नोएडा प्राधिकरण --- तेल रिस रहा है


-राजेश बैरागी-
मुखिया चाहे जितना सख्त (ईमानदार नहीं)आ जाये प्राधिकरण के स्थाई किंतु बेईमान अफसरों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। इसका जीता जागता उदाहरण है हजारों लीटर डीजल प्रतिमाह की लूट बदस्तूर जारी रहना।
         'नो कट जोन' जोन नोएडा में बिजली आपूर्ति निर्बाध नहीं है।दिन दो दिन में पीछे से कट लगने अथवा स्थानीय फाल्ट के कारण थोड़ी बहुत देर के लिए बिजली चली जाती है। इससे प्राधिकरण के शहर भर में फैले ट्यूबवेलों पर क्या तत्काल जेनरेटर चलाने की जरूरत पड़ जाती है? शायद इन जेनरेटरों को जरूरत में भी न चलाया जाता हो। फिर भी प्राधिकरण का हजारों लीटर प्रतिदिन का डीजल खर्च होता है। बिजली विभाग के बिजली आपूर्ति बाधित रहने और प्राधिकरण के जल विभाग के जेनरेटर चलाने के आंकड़ों में कोई समानता नहीं है। यदि जल विभाग की मानें तो इस शहर में बिजली कभी कभार ही आती है।तब राज्य की योगी सरकार कैसे दावा करती है कि कस्बों में भी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर दी गई है। प्राधिकरण सूत्र बताते हैं कि ट्यूबवेलों पर चलने वाले जेनरेटरों की लॉग बुक जूनियर इंजीनियरों की अलमारियों में कैद रहती हैं। पम्प ऑपरेटरों को प्रतिमाह 30 लीटर डीजल दिया जाता है जिसे वो बेच लेते हैं। बाकी हजारों (सूत्रों का दावा है कि लाखों) लीटर डीजल न कहीं से आता है और न कहीं जाता है। एक पेट्रोल पंप इस सारे खेल में बदनाम हो चुका है। अधिकारी इसी पेट्रोल पंप से तेल खरीद दिखाते हैं। कागज़ों से डीजल की बदबू की सड़ांध उठ रही है परंतु जेनरेटरों को स्टार्ट हुए भी महीनों हो जाते हैं। यह खेल करोड़ों रुपए प्रतिमाह का है। बताया गया है कि डीजल की दुर्गंध सीईओ रितु माहेश्वरी की नाक तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कागज तलब किये हैं। इससे विभाग में थोड़ा हड़कंप है। हालांकि मुखिया के दूसरे मामलों में दरियादिल होने के कारण अधिकारी मामला सुलट जाने के प्रति आश्वस्त बताये जा रहे हैं।(नेक दृष्टि हिंदी साप्ताहिक नौएडा)