कैंसर:हम लड़ेंगे और जीतेंगे भी


-राजेश बैरागी-
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) की हाल में आयी रिपोर्टों के अनुसार भारत में अगले कुछ वर्षों में प्रत्येक 10 लोगों में से एक को कैंसर हो सकता है जबकि प्रति 15 कैंसर रोगियों में से एक मौत का शिकार होगा।ये रिपोर्ट दहशत पैदा करती हैं। कैंसर एक जानलेवा बीमारी है। इसके होने के ज्ञात कारणों से अज्ञात कारण कहीं ज्यादा हैं। कभी अमीरों की बीमारी समझी जाने वाली यह बीमारी अब गरीब और स्लम क्षेत्रों में भी बराबर पायी जाती है। हमारे देश में 2018 में 11 लाख लोगों में कैंसर पाये जाने की पुष्टि हुई थी।उसी वर्ष 7 लाख अस्सी हजार से अधिक लोग इस बीमारी से काल कवलित हुए थे। आयुर्वेद ने कम से कम हजार वर्ष पूर्व कर्कट अर्बुद नाम से जिस रोग की पहचान की थी, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान उसे ही कैंसर कहता है। यह महिलाओं में स्तन, गर्भाशय से लेकर सर्वाइकल और पुरुषों में त्वचा से लेकर मूत्र नली तक कहीं भी हो सकता है।इसे होने से रोकना शायद अभी संभव नहीं है परंतु प्राथमिक अवस्था में पता चलने पर इलाज होना संभव है। शनिवार को नोएडा में दिल्ली ट्यूमर बोर्ड व कुलश्रेष्ठ कैंसर चैरीटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक सेमिनार में कैंसर के चिकित्सकों व कैंसर विजेताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए एक स्वर में इस बीमारी पर सतर्कता, अनुकूलता और हिम्मत से विजय पाने की बात कही। सेमिनार में लोगों का कहना था कि जंक फूड,गंदा खाना, निराशा और तनाव बहुत सी बीमारियों को जन्म देते हैं, कैंसर भी उनमें से एक है।योग, व्यायाम, घरेलू पौष्टिक आहार और सकारात्मक सोच से किसी भी बीमारी से बचा जा सकता है, कैंसर से भी।(नेक दृष्टि हिंदी साप्ताहिक नौएडा)